International Women’s Day- इन फिल्मों ने बढ़ाया महिलाओं का सम्मान

सालों से हमारे समाज में महिलाओं की भूमिका में काफी बदलाव होते आ रहे हैं. लेकिन महिलाओं को अभी और आगे तक जाना है. फिल्म इंडस्ट्री में भी हमने देखा है कि महिलाओं को कम आंका जाता है और उनके ग्लैमरस लुक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कई ऐसी फिल्म में हैं जिनमें महिलाओं को ग्लैमरस दिखाने बजाय सशक्त दिखाया गया है. यहां हम आपको ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में बता रहे हैं.

सोनाली बोस के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘मार्गरिटा विद ए स्ट्रॉ’ एक दिव्यांग लड़की की कहानी है. इस फिल्म में कल्कि कोचलिन एक विकलांग लड़की किरदार निभाती हैं जो सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रही है, अपनी कामुकता की खोज कर रही है और एक अनपेक्षित जीवन का नेतृत्व करने के साथ आत्म खोज की यात्रा पर निकलती है.

साल 2020 में आई ‘पंगा’ में एक ऐसी महिला को दिखाया गया, जो परिवार के लिए अपने खेल का त्याग कर देती है, लेकिन बाद में दोबारा देश के लिए खेलती है. इस फिल्म लीड रोल निभाने वाली एक्ट्रेस कंगना रनौत रही और उनके पति का किरदार जस्सी गिल ने निभाया. 

डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव की ‘डोली किट्टी और वो चमकते सितारे’ में कोंकणा सेन शर्मा और भूमि पेडनेकर लीड रोल में थे. फिल्म की कहानी महिलाओं की यौन इच्छाओं पर आधारित थी. इसमें दोनों को एक्ट्रेस को निर्भीक महिलाओं के किरदार में दिखाया गया है जोकि अपनी पसंद के लिए माफी नहीं मांगती और पुरुष प्रभुत्व वाली सोसायटी में खुद को सशक्त दिखाती हैं.

मेघना गुलजार की ‘राजी’ ने भी एक महिला केंद्रित फिल्म है. इस फिल्म में आलिया भट्ट और विक्की कौशल लीड रोल में रहे. फिल्म की कहानी एक स्कूल जाने वाली लड़की से होती और खत्म एक भारतीय जासूस के तौर पर होती है, जिसकी शादी 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तानी अधिकारी से होती है. 

साल 2020 में आई ‘छपाक’ में दीपिका पादुकोण ने एसिड अटैक सरवाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार में दिखीं. फिल्म को मेघना गुलजार ने डायरेक्ट किया. इसमें दीपिका ने मालती का किरदार निभाया. मेघना ने एक एसिड अटैक सर्ववाइवर के दर्द, डर, गुस्से और अन्य इमोशन को दिखाया गया.

साल 2016 में आई अश्विनी अय्यर तिवारी की फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ ने सभी का दिल जीत लिया था. फिल्म की कहानी एक ऐसी सिंगल मदर और उसकी बेटी पर आधारित है. फिल्म में बेटी मैथ्स से दूर भागती है और पढ़ाई की अहमियत समझाने और मोटिवेट करने के लिए उसकी मां भी स्कूल में एडमिशन ले लेती है. फिल्म में स्वरा भास्कर के काम की जमकर तारीफ हुई थी.

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