Newsi7 Special: यूपी में विकास की यह रफ्तार अब रूकनी नहीं चाहिए

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यूपी इन्वेस्टर्स समिट पर ब्यूरो चीफ दीपाली सिंह के विचार

बड़ी आबादी और संसाधनों से परिपूर्ण उत्तर प्रदेश को आज देश खराब कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के गढ़ के रूप में जानता है। जहां एक बड़ा युवा वर्ग बेरोज़गार है, जो अपने गांवों और शहरों से विकसित राज्यों की ओर पलायन कर रहा है। बड़े व्यापारी यहां उद्योग लगाने से कतराते हैं क्योंकि उनके जान माल की कोई गांरटी नहीं है। लेकिन प्रदेश की इस बीमारू खस्ताहाल छवि को पीछे छोड़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी इन्वेस्टर्स समिट के जरिए देश को यह दिखाने का प्रयास किया है कि यह तेजी से उभरता राज्य है, जहां विकास की असीम संभावनाएं हैं।     

देश और विदेश के बड़े उद्योगपतियों का एक साथ एक मंच पर आना और 4.28 करोड़ रूपये के 1,045 एमओयू पर हस्ताक्षर करना यह बताता है कि यह महज योगी सरकार का प्रयास नहीं है, बल्कि  देश और विदेश के उद्योगपतियों की दिलचस्पी का नतीजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने एक विश्वास जरूर भर दिया कि उत्तर प्रदेश के विकास में केंद्र भी पूरा सहयोग कर रहा है। 

राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाने वाला और सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों के कारण चर्चा  के केंद्र  में रहने वाला यूपी पहली बार देश और विदेश के बड़े उद्योगपतियों की मौजूदगी और बड़े निवेश को लेकर खासा चर्चा में है, जो प्रदेशवासियों में एक आशा की किरण जगा रहा है।

देश की करीब 17 फीसदी आबादी उत्तर प्रदेश में रहती है। जिसमें युवाओं की आबादी सबसे ज्यादा है। इस लिहाज से उद्योगों के  लिए श्रम शक्ति की यहां भरमार है। युवाओं को प्रशिक्षित, हुनुरमंद बनाने और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में थोड़े सुधार की आवश्यकता जरूर है। यूपी एक बड़ा बाजार बन चुका है, जहां हर तरह के उत्पाद की बड़ी खपत है। इसलिए इस राज्य की अनदेखी करने की गलती कोई नहीं करना चाहता है। 

उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादकता में अव्वल है खासकर गन्ने और गेंहू के उत्पादन में, दुग्ध उत्पादन और हस्तशिल्प के साथ धार्मिक स्थलों के लिए  भी प्रसिद्ध है। जो उद्योग-धन्धे कभी उत्तर प्रदेश की पहचान हुआ करते थे, सरकारों की अनदेखी के कारण दम तोड़ते जा रहे हैं। लेकिन योगी सरकार पुराने लघु-उद्योग धन्धों को घाटे से उबारने के साथ नये उद्योगों को प्रदेश में लगाने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था को दुरूस्त किया जा रहा है। उद्योगपतियों ने मेट्रो के साथ लगभग प्रत्येक क्षेत्र में सरकार का सहयोग करने की बात की है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इन्वेस्टर्स समिट मील का पत्थर साबित होगा। 

सरकार कोई भी हो विकास की यह रफ्तार अब रूकनी नहीं चाहिए। अन्य राज्यों से सबक लेते हुए उत्तर प्रदेश को प्राथमिक सुविधाओं से  सम्पन्न और समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित करना ही पड़ेगा। सिर्फ सरकारों को कोसने के बजाय प्रदेश के विकास में आम जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी।   

 

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