Newsi7 Special: विकास की दौड़ में पिछड़ रहा उत्तराखंड, कब सुध लेगी सरकार

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 देहरादून से विशेष संवाददाता मीना राणा का लेख

देहरादून। उत्तराखंड सुंदर प्राकृतिक नज़ारों से भरा हुआ है, जो पर्यटकों को लुभाते हैं। पर्यटन यहां का मुख्य रोज़गार का साधन है। इससे सरकार को प्रत्येक वर्ष बड़ी आमदनी होती है। जिसका बड़ा हिस्सा प्रदेश के विकास पर खर्च होना चाहिए, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई यह है कि उत्तराखंड विकास की दौड़ में पीछे चल रहा है।

देश भर में इतनी तरक्की होने के बाद भी पहाड़ों की स्थिति जस की तस है। यहां का बड़ा वर्ग पर्यटन से जुड़ा है, लेकिन इसमें रोजगार और उससे होने वाली कमाई अस्थाई है। उद्योग धंधों को स्थापित करने की रफ्तार भी यहां धीमी है।

इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात की बुनियादें सुविधाएं नाममात्र की हैं। प्रदेश के शहरों को स्मार्ट शहर बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों की गाड़ी भी कम गति से चल रही है।

शहरों में आधुनिकीकरण की आड़ में घरों के नाम पर अपार्टमेंट कल्चर खूब फल फूल रहा है, ऊंची-ऊंची इमारतें बनती जा रही हैं, जो वन्य क्षेत्रों को लीलती जा रही हैं। उत्तराखंड की नैसर्गिक सुंदरता गगनचुंबी अटालिकाओं में बदलती जा रही है।

ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जीवन यापन अत्यन्त कठिन है, ऊपर से बुनियादों सुविधाओं के न मिलने से जीवन दूभर हो गया है। रोजगार की तलाश में युवा दूसरे राज्यों को ओर पलायन कर रहे हैं।

त्रिवेंद्र सरकार को इस तरफ ध्यान देना बेहद जरूरी है। प्रदेश के विकास के साथ रोज़गार के नये साधन पैदा करना अत्यन्त आवश्यक हैं। ये तो साफ है कि देश विकास कर रहा है, पर पहाड़ नहीं।