Newsi7 Special-योगी आदित्यनाथ के लिए सरकार की साख बनाये रखना एक बड़ी चुनौती

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लखनऊ, दीपाली सिंह (ब्यूरो चीफ)।  भारतीय जनता पार्टी जहां 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है, वहीं विपक्षियों के साथ ही पार्टी पर भरोसा करने वालों के बोल भी मुखर हो गये हैं। उन्नाव रेप कांड में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पहले गिरफ्तारी में देरी और कोर्ट की फटकार ने विरोधियों को बोलनेेेे का मौका दे दिया है। अब इस मामले में आरोपी विधायक की गिरफ्तारी से भाजपा के लोकसभा चुनावों को लेकर बुने गये सपनों को एक करारा झटका माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सीबीआई जांच बैठाकर और विधायक की गिरफ्तारी ने सरकार की साख बचाने का प्रयास किया है। श्री योगी ने देर से सही पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का संकेत जरूर दिया है। पर क्या इन सबसे पार्टी की हो रही आलोचनाओं का जो बाजार गर्म है, वह ठंडा हो जायेगा और योगी सरकार अपनी साख जनता के बीच एक बार फिर मजबूत कर पायेगी, यह प्रश्न अभी भी बना हुआ है।

योगी सरकार ने अपने पिछले एक साल के कार्यकाल में उठाए गये जनहित के कदमों से खूब वाह-वाही बटोरी। फिर चाहे  वो किसानों का 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ करना,  कानून-व्यवस्था सुधारने की दिशा में अपराधियों के ताबडतोड़ इंकॉउटर और सरेंडर कराना, बुंदेलखंड के विकास पर विशेष बल देना,  इन्वेस्टर समिट के माध्यम से 24 लाख करोड़ निवेश के करार हुए, जिससे युवाओं में रोजगार की आशा जगी है। सरकार ने 1.25 लाख सड़के गड्ढामुक्त कराई। आलू नीति बनाकर कर किसानों का राहत पहुंचाई।  शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया,  नकल पर रोक लगाने के लिए उठाये गये कड़े कदम उठाए और निजी स्कूलों की मनमानी पर अध्यादेश लाकर रोक लगाई।  सरकार ने ऐसे कई काम किये, जिसने पार्टी का ग्राफ काफी ऊंचा कर दिया। इन्हीं बढ़े हुए हौसलों के साथ भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी 80 सीटें जीतने के लक्ष्य को लेकर तैयारी कर रही थी, लेकिन उन्नाव रेप और मर्डर केस ने पार्टी की बनी बनाई छवि को धूमिल कर दिया है।    

इससे पहले भाजपा सरकार के खिलाफ विरोधियों के पास कोई मुद्दा ही नहीं था, लेकिन उन्नाव कांड ने उन्हें बोलने का मौका दे दिया। इस मामले ने सरकार की ऐसी फजीहत कराई जिसने योगी के सारे किये-कराये पर पानी फेर दिया। घटना के बाद से सरकार के हर फैसले में साथ देने वाले भाजपा संगठन में ही सरकार के खिलाफ बोल फूटने लगे। पार्टी के भीतर भी दबी जुबान में कई नेता मान रहे हैं कि सरकार ने इस मामले में अपनी चहुंतरफी आलोचना कराने के बाद देर से कदम उठाया। 

पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जहां उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों की रणनीति तय करने आये थे, लेकिन उन्हें योगी सरकार की उन्नाव मामले में मीडिया, विरोधियों के साथ पार्टी की निंदा के स्वर सुनाई दिये, जिससे वे काफी निराश होकर चले गये, हालांकि जाते ही उन्होंने प्रदेश के मंत्रिमंडल और संगठन में  बड़े और कड़े बदलाव के संकेत दे दिये हैं। जिसका असर आगामी विधान परिषद चुनाव के बाद शायद धरातल पर दिखाई देगा।

उम्मीद है कि भाजपा उन्नाव मामले से सबक लेते हुए आगे हर कदम फूंक-फूंक कर चलेगी और दागदार चेहरों को पार्टी से बाहर करने और आगामी चुनावों में टिकट न देकर अपनी भूल सुधारेगी।  साथ ही सबका साथ सबका विकास के मंत्र के साथ आगे बढ़ते हुए प्रदेश के विकास को प्राथमिकता देगी।  

 

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