हरिद्वार महाकुंभ 2021ः समाज का नजरिया बदलने पर मजबूर कर रहे किन्नर

किन्नरों के प्रति समाज का नजरिया आज भी नहीं बदला है। समाज के इसी भेदभाव ने किन्नरों को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है। शादी विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों में नेग मांगना उनकी परंपरा का हिस्सा है। अब इसी समाज के लोग हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

महाकुंभ मेले के लिए तीर्थनगरी में पहुंचे किन्नर अखाड़ा से जुड़ी किन्नरों की बात करें तो यहां मॉडल से लेकर, इंजीनियरिंग और चित्रकार भी हैं। दिल्ली की रूद्राणी क्षेत्री ने फिल्म द लास्ट कलर में दूसरी मुख्य भूमिका निभाई है। यह फिल्म बनारस की विधवाओं पर आधारित है और अमेजॉन पर चल रही है। फिल्म को शेफ विकास खन्ना ने निर्देशित किया है।

रूद्रणी ट्रांसजेंडरों के लिए अपनी एक मॉडलिंग एजेंसी भी चलाती है। प्रयागराज की वैष्णवी नंदगिरि ने एमिटी विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन फाइन ऑर्ट का कोर्स किया है। वह देश-विदेश में अपनी कला का लोहा मनवा चुकी हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ की रहने वाली पवित्रानंद गिरि किन्नर अखाड़ा की पीठाधीश्वर हैं। वह एलजीबीटीक्यू (लेस्बियन, गे, बाईसैक्सुअल, और ट्रांसजेंडर) के लिए काम करती हैं। राजस्थान जयपुर की पुष्पा माई ट्रांसजेंडर के उत्थान के लिए काम करती हैं।

रूद्राणी क्षेत्री का कहना है कि हमारे समाज को मुख्य धारा से हटाया गया है। नौकरी हो, कला या राजनीति किन्नर समाज अब हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उनका कहना है कि लोगों में भेदभाव इतना है कि उन्हें लगता है कि हर प्रोडक्ट मर्दों या औरतों के लिए ही है। जबकि ऐसा नहीं है। 

रूद्राणी क्षेत्री का कहना है कि हमारे समाज को मुख्य धारा से हटाया गया है। नौकरी हो, कला या राजनीति किन्नर समाज अब हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उनका कहना है कि लोगों में भेदभाव इतना है कि उन्हें लगता है कि हर प्रोडक्ट मर्दों या औरतों के लिए ही है। जबकि ऐसा नहीं है। 

 

 

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