गुरु गोविंद सिंह जयंती 2021- जानें गुरु के पांच सिद्धांत

आज गुरु गोविंद सिंह जयंती है। गुरु गोविंद सिंह सिखों के 10वें गुरु थे। इन्हीं के जन्मदिन पर ही गुरु गोविंद सिंह जी जयंती मनाई जाती है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से दूसरों के लिए एक मिसाल कायम की। वो हमेशा ही धार्मिकता और समानता के लिए खड़े रहे हैं। उनका जीवन परोपकार और त्याग का जीता जागता उदाहरण है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पौष महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था. उन्होंने खालसा वाणी – “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” भी दी।

मान्यता के अनुसार, यह इनकी 354वीं जयंती है। खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था। गुरु गोविंद जयंती के दिन सिख समुदाय के लोग एक साथ प्रार्थना करते हैं। साथ ही जुलूस निकालते हैं। इस दिन कई भक्ति गीत गाए जाते हैं। जुलूस निकालते समय वे रास्ते में आने वाले गुरुद्वारा पर रुकते हैं और विशेष प्रार्थना करते हैं।

गुरु गोविंद सिंह जयंती पर सिख परिवार जरुरतमंदों को दान करते हैं। साथ ही लोग गरीबों को भोजन वितरित करते हैं। इस दिन गुरुद्वारे में गुरु नानक गुरु वाणी गाई जाती है। यह है इक ओंकार सतनाम… इक ओंकार सिख धर्म के मूल दर्शन का प्रतीक है। यह कहता है कि ‘परम शक्ति एक ही है’। सिखों के लिए इस गुरुवाणी का महत्व बहुत ज्यादा है। इसे बेहद ही शुभ माना जाता है।

गुरु गोबिंद सिंह ने जीवन जीने के लिए पांच सिद्धांत भी बताए जिन्हें ‘पांच ककार’ कहा जाता है. पांच ककार में ये पांच चीजें आती हैं जिन्हें खालसा सिख धारण करते हैं. ये हैं- ‘केश’, ‘कड़ा’, ‘कृपाण’, ‘कंघा’ और ‘कच्छा’. इन पांचो के बिना खालसा वेश पूर्ण नहीं माना जाता है.

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