Tourism- प्राकृतिक छटाओं के बीच स्थित फूलों की घाटी करती है सैलानियों काे आकर्षित

फूलों का सदियों से भारतीय समाज में विशेष महत्व रहा हैं। पुष्प की अभिलाषा नामक कविता में कविवर माखनलाल चतुर्वेदी ने जिस सुंदरता से वर्णित किया है वह फूलों के प्रति हमारे अनुराग की भावनाओं को ही व्यक्त करता हैं। हाल ही में अयोध्या में श्रीराम मंदिर का शिलान्यास कार्यकम ताजा सबूत है जब सजाने के लिए फूल विदेश से मंगवाये गये। रंगबिरंगे विभिन किस्मों के सुंदर फूल हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। फूलों की चर्चा के दौरान हम सैर करते हैं एक ऐसे स्थल की जिसे फूलों की घाटी कहा जाता है।

भारत के अनेक खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों में फूलाें की घाटी नामक स्थल अपनी भौगोलिक स्थिति, हरे भरे लंबे-चौड़े अल्पाइन घास के सुंदर मैदान, कई प्रजातियों एवं किस्मों के रंगबिरंगे फूलों से महकती हैं, जो इन दिनों सैलानियों के आकर्षण के केंद्र बनी हुई हैं। यहां लहराते, महकते, शोभा बिखरते अनेक रंगों, किस्मों, प्रकार के फूलों की यह घाटी किसी दूसरी दुनिया की सैर कराने के आभासी सम्मोहन से भरपूर हैं।

यह बात अलग है कि कोरोना के माहौल में सैलानियों की आवक बहुत कम हैं। फूलों की नयाभिराम घाटी तीन किलोमीटर लंबी एवं आधा किलोमीटर चौड़ी है। यह उद्यान 87.50 किलोमीटर क्षेत्रफल में है। यह रमणीक घाटी नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा है जिसे यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने 1982 में प्राकृतिक श्रेणी में विश्व धराेहर घोषित किया।

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