Social Media पर तेजी से फैलती है Fake News, स्टीज़ में हुआ बड़ा खुलासा

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क्या आप सोशल मीडिया पर पढ़ी गई हर बात पर भरोसा करते हैं? क्या आप ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे नेटवर्किंग प्लेटफार्मों पर जो पढ़ते हैं, उसे क्रॉसचैक करते हैं? यदि आपका जवाब पहले प्रश्‍न के लिए हां है और दूसरे के लिए नहीं में है, तो आपको इस बारे में कुछ करने की जरूरत है. दरअसल, एक अध्‍ययन में असली-नकली खबरों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए. 

नेटफ्लिक्स पर हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री आई है, जिसने इस मामले को उठाया गया. इसमें बताया गया था कि सोशल मीडिया दिग्गज कैसे काम करते हैं और वे कैसे यूजर्स को मैनुपुलेट कर कई सेवाओं की ओर मोड़कर अपने क्‍लाइंट्स का बिजनेस बढ़ाते हैं. ‘The Social Dilemma’  शीर्षक से आई यह डॉक्‍यूमेंट्री संयुक्त राज्य अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन के बारे में बताती है. 

Manipulation Agent के रोल में सोशल मीडिया 

साइंस मैगजीन में प्रकाशित हुआ यह अध्ययन चुनावों को प्रभावित करने में सोशल मीडिया के रोल और महामारी को लेकर गलत जानकारियां फैलाने को लेकर फिर से प्रासंगिक हो गया है. जब यह अध्ययन सामने आया था तब अध्ययन के सह-लेखक सिनान अरल ने कहा था कि वे इससे मिले ‘परिणामों से बहुत हैरान थे’. जाहिर है यह जानकर कौन आश्चर्यचकित नहीं होगा कि वह रोजाना जिन समाचारों को सोशल मीडिया पर देख रहा है वे वास्‍तव में नकली हैं. 

फेक न्‍यूज की स्‍पीड छह गुना अधिक

जानकारियों के फेक होने के अलावा अध्ययन में एक और चौंकाने वाली यह बात पता चली कि नकली न्‍यूज दरअसल असली न्‍यूज की तुलना में ट्विटर यूजर्स के पास छह गुना अधिक तेजी से पहुंचती है. इस अध्‍ययन को पूरा होने में 2 साल लगे और इस दौरान डेढ़ हजार लोगों पर इस बात का अध्ययन किया गया कि उनके पास असली और नकली न्‍यूज के पहुंचने की स्‍पीड कितनी थी. 

अध्ययन ने दावा किया कि ‘ इंफॉर्मेशन की सभी कैटेगरीज में से झूठी कहानियां सच्चाई की तुलना में सबसे अधिक तेजी से, गहराई तक और अधिक व्यापक रूप से फैलती हैं.’ इसके को-ऑथर ने कहा कि ‘मुझे यह बात बहुत परेशान करने वाली लगी’. 

इस बात का अध्‍ययन करने के लिए शोधकर्ताओं ने 2006 और 2017 के बीच ट्विटर पर आईं कहानियों और ट्वीट्स को ध्यान में रखा. वह कहानी सच्‍ची है या झूठी है इसका पता लगाने के लिए उसने 6 फैक्‍ट चैकिंग ऑर्गेनाइजेशन पर भरोसा किया. 

अध्ययन के अनुसार, अन्य खबरों की तुलना में राजनीति से जुड़ी झूठी खबरें व्यापक रूप से फैलती हैं. ये गलत जानकारी वाली अन्य खबरों की तुलना में भी ‘ज्‍यादा वायरल’ होती हैं. 

इसमें यह भी पता चला कि कैसे इंसान और बॉट्स (Bots) लगभग एक समान तेजी से झूठी जानकारियां फैलाते हैं. बल्कि इंसान से इनके फैलने की संभावना ज्‍यादा होती है. बता दें कि बॉट्स ऐसे प्रोफाइल होते हैं, जो सोशल मीडिया प्‍लेफॉर्म पर खुद मैसेज जेनरेट करते हैं, अकाउंट्स को फॉलो करते हैं और रिप्‍लाई करने, शेयर करने जैसे काम करते हैं. 

साभार- Zee News

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