एसिम्प्टमैटिक बच्चाें में अधिक पाए जा रहे हैं काेराेना के लक्षण

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भारत में आजकल काेराेना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस भ्रम में ना रहें कि बच्चे कोरोना से बिल्कुल सुरक्षित हैं। ऐसे दावे कुछ स्टडी में किए गए थे लेकिन मुंबई  में अब तक 9 साल से छोटे 2,671 बच्चे कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। वहीं 9 साल से छोटे 12 बच्चों की अब तक मौत हुई है। इधर, एक स्टडी कहती है कि बिना लक्षण वाले बच्चे तेजी से कोरोना फैलाते हैं।

जनरली ये बच्चे बिना लक्षण वाले होते हैं या काफी माइल्ड सिम्प्टम भी रहता है। 90-95 फीसदी में वायरल इलनेस जैसे लक्षण होते हैं, जैसे कि कफ, कोल्ड, फीवर। जो सीवियर सिम्प्टम वाले होते हैं, उनको पहले से कोई बीमारी होती है जैसे क्रोनिक लंग, लीवर, हार्ट डीज़िज़, उनमें सेविरयटी ज्यादा रहती है।

मुंबई में बच्चों के पॉजिटिव होने की दर जहां 2 फीसदी से कम है तो मौत की दर 1 फीसदी भी नहीं है लेकिन विदेशी रिसर्च में पाया गया है कि बिना लक्षण वाले बच्चों से इसका वायरस तेजी से फैलता है। एक एसिम्प्टमैटिक बच्चा जिसमें कोविड का वायरस है और एक अडल्ट पेशेंट जो हॉस्पिटल में एडमिट है, दोनों को अगर कम्पेयर करें तो जो दोनों का वायरल लोड है, एसिम्प्टमैटिक बच्चे में ज्यादा पाया गया है। 

बच्चों में कोविड के असर पर दुनियाभर में स्टडी जारी है पर ऐसी तस्वीरें बच्चों के साथ-साथ घर के बुजुर्गों के लिए भी चिंतित करती हैं।

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