Newsi 7 Special- प्राइवेट स्कूलाें पर चला योगी सरकार का चाबुक, अभिभावकों ने जताया आभार

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लखनऊ, पराग कुमार। आखिरकार वह दिन आ ही गया जब अभिभावकाें की सालाें की मेहनत का फल मिल गया और इस मनवांछित फल को देने का श्रेय जाता है प्रदेश की भाजपा सरकार काे, जिसके प्रतिभाशाली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह करके दिखाया।  निजी स्कूलाें में हर साल बेहताशा बढ़ती फीस से अभिभावक आजिज आ चुके थे और समय-समय पर पूर्ववर्ती सरकाराें चाहे वह बसपा हाे या सपा सबमें विभिन्न संगठनों के माध्यम से विरोध भी दर्ज कराया जा चुका था, लेकिन प्राइवेट स्कूलाें में कमीशनखाेरी और मुनाफाखाेरी की वजह से कभी भी इस पर लगाम कसने की कवायद नहीं की गई । परिणामस्वरूप निजी स्कूलाें की मनमानी बढ़ती गई और कॉपी किताबों से लेकर यूनिफार्म तक में कराेड़ाें का खेल चलता रहा । इस गाेरखधंधे में बेचारा अभिभावक घुटता पिसता रहा लेकिन जनता के दर्द काे समझने वाली यूपी की याेगी सरकार ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपाेषित स्वतंत्र विद्यालय ( शुल्क निर्धारण ) अध्यादेश 2018 काे लाने की घोषणा कर आम आदमी के चेहरे पर खुशी लाने की काेशिश की है ।

उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा यह भी की कि 2015-16 को निजी स्कूलों की फीस निर्धारण का वर्ष बनाया जायेगा। आपको बता दें कि फीस निर्धारण का फार्मूला यह है कि उस वर्ष के वार्षिक प्रकाशित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में पांच फीसदी जोड़ने पर जो योग आयोगा उससे ज्यादा फीस अब नहीं बढ़ सकेगी। इसका मतलब यह हुआ कि 2015-16 के शैक्षिक सत्र की फीस से 2018-19 की फीस की गणना सरकारी फार्मूले से होगी और इस तरह हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूल इस साल ऐसा नहीं कर पायेंगे, जिसका सीधा लाभ अभिभावकों को होगा।

निश्चित रूप से यह सराहनीय पहल है लेकिन अब सरकार और उसके नुमांइदाें की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है क्योंकि इस कानून काे प्रभावी ढंग से लागू करना होगा । अगर सरकार पालन करवाने में सफल हाे जाती है ताे बच्चाें काे अच्छी और सुगम शिक्षा का माैका मिलेगा।  बच्चे शिक्षा के अधिकार का समुचित उपयोग कर एक शिक्षित समाज की नींव रखेंगे, इससे न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश का भविष्य सुरक्षित होगा जाे सबके लिए हितकारी हाेगा।

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