गुरू पूर्णिमा का महत्व

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आज व्यास पूर्णिमा है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन वेद और महाकाव्य के रचयिता वेदव्यास का जन्म हुआ था। अत: इस दिन व्यास पूर्णिमा मनाई जाती है।

इस दिन गुरु की पूजा विधि पूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन में नया सवेरा होता है। जबकि जीवन का मार्ग भी प्रशस्त होता है। आज के दिन दान पुण्य करने का विशेष विधान है। अत: अपनी क्षमता अनुसार दान-पुण्य जरूर करें।

वेदव्यास को भगवान विष्णु का कलावतार माना गया है। अतः भगवान विष्णु के निमित्त पूजा करने से भी पूजा स्वीकार होता है। ऐसा कहा जाता है कि गुरु अपने शिष्य के जीवन में फैले अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाते हैं। जबकि जीवन में सतमार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण कर दिन की शुरुआत करें। इसके पश्चात धरती माता को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लें। अब नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान ध्यान करें और आमचन कर व्रत संकल्प लें।

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