इस वजह से कोरोना को लेकर चिंतित हैं WHO, सामने आई ये चौका देने वाली रिपोर्ट..

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कोरोना वायरस से दुनियाभर में अब तक 48 लाख 18 हजार 676 लोग संक्रमित हो चुके हैं। 18 लाख 64 हजार 118 ठीक हुए हैं। वहीं, मौतों का आंकड़ा 3 लाख 16 हजार 953 हो गया है। चीन में कोरोना का एपिसेंटर रहे वुहान में तीन दिन में 4 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं। संक्रमण की दूसरी लहर आने के बाद सरकार ने 14 मई से सभी 1.1 करोड़ निवासियाें का काेराेना टेस्ट शुरू किया है। स्थानीय प्रशासन ने टेस्टिंग प्रक्रिया काे ‘10-दिन की लड़ाई’ नाम दिया है। यहां अब तक संक्रमण के 50 हजार मामले सामने आ चुके हैं और 3,800 लाेगाें की माैत हाे चुकी है। वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रकोप से सभी परेशान हैं और सभी इसकी वैक्सीन का इन्तजार कर रहे हैं। शोधकर्ताओंद्वारा लगातार इस ओर कदम बढाए जा रहे हैं। इसी बीच कोरोना वायरस से बचाव के लिए हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) को एक अहम हथियार बताया जा रहा था। स्वीडन समेत कुछ देशों ने इस पर अमल करना भी शुरू कर दिया हैं। खतरनाक साबित हो सकती है हर्ड इम्युनिटी हालांकि, अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) को खतरनाक बताते हुए इसको लेकर सभी देशों को चेतावनी भी दी है। एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर माइकल रेयान ने हर्ड इम्युनिटी पर चर्चा करते हुए कहा कि यह सोचना ही गलत है कि कोई देश जादुई तरीके से कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी आबादी में इम्युनिटी विकसित कर सकता है। उन्होंने बताया कि हर्ड इम्युनिटी का प्रयोग आमतौर पर यह जानने के लिए किया जाता है कि टीकाकरण नहीं होने वालों की सुरक्षा के लिए आबादी के कितने लोगों का टीकाकरण करने की आवश्यकता है। डॉक्टर रेयान ने कहा कि प्राकृतिक संक्रमण जैसे शब्दों के इस्तेमाल के समय हम लोगों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। यह हर्ड इम्युनिटी की गणना को खतरनाक बना सकता है क्योंकि इसकी गणना का केंद्र बीमार और बीमारी से जूझ रहे लोग नहीं होते हैं। यह सोचना गलतफहमी डॉक्टर रेयान ने कहा कि जो लोग यह सोच रहे कि इस बीमारी से सिर्फ गंभीर मामले ही सामने आएंगे और बाकी लोगों को हर्ड इम्युनिटी विकसित करने के लिए संक्रमित होना पड़ेगा और जितने ज्यादा लोग संक्रमित होंगे, उतनी जल्दी यह महामारी चली जाएगी और लोग फिर से सामान्य जीवन शुरू कर सकेंगे। यह उनकी गलतफहमी है। डॉक्टर रेयान ने कहा कि सीरो महामारी विज्ञान के प्रारंभिक परिणाम इसके विपरीत हैं। पूरी दुनिया में गंभीर रूप से बीमार लोगों का अनुपात संक्रमित लोगों की तुलना में अधिक है। जो संक्रमित हो चुके हैं। कुल आबादी में संक्रमित लोगों की संख्या हमारी अपेक्षा से बहुत कम है। इसका मतलब है कि अगर हम हर्ड इम्युनिटी पर जाते है तो हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है। हम बार-बार कह रहे हैं कि यह एक गंभीर बीमारी है और लोगों की सबसे बड़ी दुश्मन है। जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है, तब तक एक व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं है।’ हर्ड इम्युनिटी का प्रयोग करने वाले देशों को चेताया हर्ड इम्युनिटी का प्रयोग कर रहे देशों को इसके खतरनाक परिणाम के बारे में चेतावनी देते हुए डॉक्टर रेयान ने कहा कि कुछ लोग सावधानियां बरतने में लापरवाही कर रहे हैं और किसी भी तरह का योगदान नहीं कर रहे हैं। इन्हें लगता है कि कुछ बुजुर्ग लोगों की मौत के बाद किसी जादू की तरह इनमें हर्ड इम्युनिटी आ जाएगी। उन्होंने कहा, यह एक बहुत खतरनाक गणना है। हमें इस लड़ाई के अगले चरण की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में हमें अपनी प्राथमिकताएं तय करने की आवश्यकता है। प्राकृतिक संक्रमण के जरिए हर्ड इम्युनिटी विकसित करने की दूसरी चुनौतियां भी हैं। हर्ड इम्यूनिटी में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एंटीबॉडीज आम तौर पर एक से तीन सप्ताह में विकसित होते हैं। कुछ लोगों में एंटीबॉडी का ह्यूमरल इम्यून रिस्पांस विकसित नहीं हो पाता है। यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा क्यों होता है। इसके अलावा, अभी तक इसका पता भी फिलहाल नहीं चल पाया है कि वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी कितनी देर तक काम करता है। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी पर विश्वाश करना खतरनाक साबित हो सकता है।