क्या एक बार होने के बाद दोबारा हो सकता हैं कोरोना वायरस, एक बार जरुर पढ़ ले ये खबर

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कोरोना बीमारी के खिलाफ मानव शरीर का प्रतिरोधक तंत्र कैसे काम करता है, इस पर से अभी भी वैज्ञानिक पर्दा नहीं उठा पाए हैं। एक शुरुआती अध्ययन में दावा किया गया है कि कोविड-19 का संक्रमण दोबारा नहीं हो सकता।

चीन के शोध संस्थान इमर्जिंग एंड री-इमर्जिंग इंफेक्सियस डिजिज सहित छह संस्थानों के संयुक्त शोध में यह दावा किया गया है। एक पत्रिका में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि दो बंदरों पर किए गए परीक्षण से पता चला है कि कोविड-19 का संक्रमण दोबारा नहीं होता है।

इससे पूर्व जर्नल आफ मेडिकल वायरोलॉजी में प्रकाशित एक वैज्ञानिक लेख में कहा गया कि आमतौर पर वायरस का संक्रमण दोबारा होने की संभावना क्षीण रहती है। इसे इस प्रकार समझ सकते हैं कि हमारा शरीर सभी मौजूदा वायरस का प्रतिरोध करने में सक्षम है लेकिन जैसे ही कोई नया वायरस या उसका स्ट्रेन आता है तो प्रतिरोधक तंत्र उसका मुकाबला नहीं कर पाता।

लेकिन दोबारा यह वायरस फिर हमला करता है तो फिर प्रतिरोधक तंत्र उसे बेअसर कर देता है। लेकिन यह बात उन्हीं पर लागू होती है जिनका प्रतिरोधक तंत्र मजबूत है। कोरोना के मामले में भी यही कहा जा रहा है। दोबारा संक्रमण का मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि चीन, जापान व दक्षिण कोरिया में कोविड-19 के कई मामले आए जिनमें रोगी स्वस्थ होकर घर जा चुके थे लेकिन कुछ दिनों बाद दोबारा जांच में पॉजिटिव निकले। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दोबारा संक्रमण नहीं है। यह साबित करता है कि संक्रमितों के ठीक होने के दो-तीन सप्ताह बाद भी शरीर में वायरस सक्रिय रह सकता है। हालांकि ऐसा रोगी दूसरे को बीमारी फैला सकता है या नहीं, अभी कोई नतीजा वैज्ञानिक नहीं निकाल पाए हैं।

बंदरों में दोबारा संक्रमण नहीं होने को वैज्ञानिक वर्ग स्वाभाविक मान रहा है लेकिन सिर्फ दो विषय पर कम अवधि के अध्ययन से वैज्ञानिक आश्वस्त नहीं हैं। वे कहते हैं कि कोरोना नया वायरस है और इसके प्रभाव को समझने के लिए दीर्घकालिक और बड़े अध्ययन की जरूरत है। वर्धमान महावीर मेडिकल कालेज के प्रोफेसर जुगल किशोर के अनुसार, सार्स जो कोरोना का ही एक संक्रमण है, उसमें दोबारा संक्रमण नहीं देखा गया था। यह भी उम्मीद की जानी चाहिए जो आबादी सार्स से संक्रमित हो चुकी है उस पर कोरोना का संक्रमण नहीं होगा।