पिता के लिये एक बेटी ने लगायी अपनी जान की बाजी

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बागपत: बागपत में एक बेटी ऐसी भी है जिसने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और अपने लिवर का आधे से ज्यादा हिस्सा पिता को देकर जान बचा।ली। इसके लिए उसने मौत को करीब से देखा, लेकिन सवाल पिता की जान बचाने का था तो जरा भी हिम्मत नहीं हारी। आज यह बेटी एकदम स्वस्थ है और लोगों को सलाह देती है कि बेटियों को मत मारो। बेटी को बचाओ और पढ़ाओ।

लूंब गांव की रहने वाली गुडहल ने बताया कि कई माह पहले 55 वर्षीय उसके।पिता किरणपाल का लगभग 90 प्रतिशत लिवर खराब हो गया था। उसके पिता मौत के दरवाजे पर पहुंच गए थे। उसके एक बड़ी बहन डेजी और एक छोटा भाई सचिन है। परिवार में जब पता चला कि पिता का लिवर बेकार हो गया है और अब उन्हें लिवर चाहिए तो उसने ही फैसला लिया कि वह अपने पिता को मरते नहीं देख सकती और अपने लिवर का हिस्सा पिता को दे देगी।

उसके पिता को सर गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने बताया कि 60 प्रतिशत लिवर किरणपाल को ट्रांसप्लांट किया जाए तो जान बचेगी।

गुडहल ने बताया कि उसने सहमति जता दी, जिसके बाद चिकित्सकों ने उसका लगभग लगभग 17 घंटे तक ऑपरेशन किया और 60 प्रतिशत लिवर उसके पिता को ट्रांसप्लांट कर दिया। वह तीन दिन और उसके पिता आठ दिन तक आइसीयू में रहे। इस दौरान उसने अपनी बीटीसी की परीक्षा भी छोड़ दी थी। क्योंकि पहले पिता की जान बचानी थी और बाद में परीक्षा। उपचार में लगभग 50-35 लाख रुपए खर्च हुए। अब वह पूरीतरह स्वस्थ है।

बेटी पर गर्व है मुझे

ईंट भट्ठा व्यवसायी किरणपाल ने बताया कि पहले मुझे बुखार और पीलिया की शिकायत थी। गांव में उपचार और झाड़फूंक कराया। हालत बिगड़ी तो मेरठ के बाद दिल्ली उपचार कराया। मेरी बेटी ने अपना 60 प्रतिशत लिवर मुझे डोनेट किया है। सोच भी नहीं सकता था कि बेटी मेरे लिए इतना करेगी। मेरी जान बचाने के लिए बेटी ने अपनी जान की कीमत नहीं समझी।