पाक का विश्व शान्ति में योगदान का कोई इरादा नहीं

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प्रतीक बाजपेई, लखनऊ। पुरानी कहावत है “किसी व्यक्ति को आप बोलने की पूरी आजादी देंगे तो बोलते-बोलते वो अपना चरित्र खुद ही बोल जाएगा। “पाकिस्तान के वजीर-ए-आज़म इमरान खान ने अपने देश में पल रहे आतंकियों का बचाव कर अपनी नियत पूरी तरह जग जाहिर कर दी है कि वो उन आतंकवादियों को संरक्षण देते रहेंगे। हालांकि, उन्होंने ऐसा साफ तौर पर नहीं कहा पर आतंकियों को शहीद बोलकर उन्होंने अपनी मंशा साफ जरूर कर दी।

जिस मंच से विश्व भर में शांति और अमन लाने का संदेश देना चाहिए, जहां से पूरे विश्व को अपने देश की उपलब्धियां बतानी चाहिए वहां से वो नफरत और युद्ध जैसी बातें करके न सिर्फ उस मंच का अपमान कर रहे थे बल्कि इस बात की भी पुष्टि कर रहे थे कि पाकिस्तान का विश्व शांति में योगदान करने का कोई इरादा नहीं है। आज के परिदृश्य में जहां पर्यावरण समेत तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात होनी चाहिए वहां पर वो लोगों को परमाणु हमले के परिणाम बता रहे थे। खुद तो यूएन के मंच से भारत को मानवाधिकार का पाठ पढ़ा रहे थे और अपने घर मे पनाह दिए आतंकियों को आज़ादी के सैनिक घोषित करने पर तुले हुए थे। वो अनुच्छेद 370 के मामले को भी भुनाने में कामयाब नहीं हो पाए। ये तमाम बातें इस बात की परिचायक हैं कि आप इतने बड़े मंच के लिए योग्य नहीं है। आप एक निम्न सोच रखने वाले कुंठित मानसिकता वाले देश हैं। पाकिस्तान जो चीन के रहमोकरम पर फल-फूल रहा है वो अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार करने के बजाय भारत को गीदड़ भभकी देने में लगा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय ‍विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव विदिशा मैत्री ने जिस बेबाकी से पाकिस्तान को जवाब दिया है वो इमरान खान को उनकी विश्व पटल पर जगह दिखाने के लिए काफी है। उन्होंने इमरान खान के भाषण की तुलना ‘दारा आदमखेल’ से की।

दारा आदमखेल वो जगह है जहां पर खतरनाक हथियारों की कालाबाजारी होती है। आतंक की फैक्टरी पाकिस्तान को यहीं से हथियार मुहैया करवाए जाते हैं। यूएन में पाकिस्तान कूटनीतिक तौर पर बुरी तरह असफल रहा है। इस बात की भड़ास वो वापस पाकिस्तान पहुँचकर किसी न किसी तरीक़े से जरूर निकालने की कोशिश करेंगे।