बागपत के युवा वैज्ञानिक डा. रामकरण शर्मा ने बढ़ाया देश का मान

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बागपत जिले में ट्योढ़ी गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़े डा. रामकरण शर्मा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीतकर गांव से लेकर देश का नाम गौरवान्वित किया है। इस बार उन्होंने 35 देशों के 150 वैज्ञानिकों को
पछाड़कर जापान में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार जीता है। डॉ. रामकरण शर्मा ने ‘औद्योगिक रसायन हमारी वायु एवं पानी को प्रदूषित कर रहे हैं’ विषय पर शोध प्रस्तुत कर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया।

बागपत के डॉ. रामकरण शर्मा को जापान में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिलावैज्ञानिक डा. रामकरण शर्मा ने अमेरिका, फ्रांस, चीन, इंग्लैंड, जर्मनी, कोरिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, ताइवान समेत 35 देशों के 150 वैज्ञानिकों के साथ युवा वैज्ञानिक पुरस्कार के लिए विज्ञान प्रतियोगिता में भाग लिया था। जापान
में एक सप्ताह चली प्रतियोगिता में सभी ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसमें उनके शोध पत्र को उच्च श्रेणी का पाया गया और उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से नवाजा गया।

यह पुरस्कार उन्हें प्रोफेसर ताएरोओशिमा, जापानी सोसाइटी ऑफ एक्सट्रीमोफिक्स, फुकुओका, जापान के अध्यक्ष ने
दिया। गौरतलब है कि पिछले साल इटली में बेस्ट रिसर्च अवार्ड से नवाजे गए डा. रामकरण शर्मा गांव में प्राइमरी स्कूल में पढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचे हैं। उन्हें स्पेशल एंजाइमों पर शोध के लिए अमेरिका, इटली और नासा की ओर से कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

 डा. रामकरण शर्मा जर्मनी, अमेरिका और सऊदी अरब के वैज्ञानिकों के साथ काम रहे हैं और एंजाइमों से हानिकारक रसायन को हटाने का प्रयास कर रहे हैं। एंजाइम प्रोटीन के रूप में जैविक उत्प्रेरक हैं जो जीवित जीवों की कोशिकाओं में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं।

औद्योगिक रसायन से प्रदूषण पर किया शोध

डॉ. शर्मा ने अपने शोध को प्रस्तुत करते हुए कहा कि औद्योगिक रसायन हमारी वायु एवं पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। समय के साथ हालात बदतर हो रहे हैं। यह हानिकारक रसायन मानव और जानवरों में कई घातक बीमारियों का कारण हैं। हर दूसरे सेकेंड में 310 किलोग्राम विषैले रसायनों को दुनिया भर की औद्योगिक सुविधाओं द्वारा हमारी वायु, भूमि और पानी में छोड़ा जाता है। प्रत्येक वर्ष उद्योग हमारे पर्यावरण में विषाक्त रसायनों की मात्रा बढ़ा रहे हैं। प्रतिवर्ष 2 मिलियन टन ऐसे केमिकल्स हैं जो कैंसर जैसी घातक बीमारी पैदा करते हैं। उद्योग में हानिकारक रसायनों को एंजाइमों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। लेकिन ये एंजाइम औद्योगिक कठोर परिस्थितियों में काम करने के मामले में विशिष्ट होना चाहिए। इस वैश्विक समस्या को हल करने के लिए ही जर्मनी, अमेरिका और सऊदी अरब के साथ काम कर रहे हैं। हम लाल समुद्र से बैक्टीरिया का उपयोग कर रहे हैं ताकि विशेष एंजाइमों को प्राप्त किया जा सके और उन्हें उद्योग में उपयोग किया जा सके।