हांगकांग में प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप से लगाई मदद की गुहार

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हांगकांग में हजारों प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रगान (स्टार स्पैंजल्ड बैनर) गाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद की गुहार लगाई है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनको चीनी सत्ता से मुक्ति दिलवाएं। इसके बाद पुलिस ने जब उनको रोका तो महानगर के कई इलाकों में टकराव शुरू हो गया। अमेरिका ने चीन से हांगकांग के आंदोलन से निपटने में संयम बरतने की अपील की है। चीन ने इसको अपना आंतरिक मामले बताते हुए मध्यस्थता की किसी संभावना से इनकार किया है। चीन ने अमेरिका और ब्रिटेन को हांगकांग की अशांति के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

हांगकांग में रविवार को आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई। धूप में छाता लगाए और हाथ में लोकतांत्रिक मांगों के कार्ड लिए युवा धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहे। लेकिन देखते ही देखते आंदोलन हिंसक हो उठा। इसके बाद बैरिकेडिंग और सड़क के किनारे की इमारतों की खिड़कियों की तोड़फोड़ शुरू हो गई। सड़कों पर आगजनी की गई। पुलिस ने हिंसक आंदोलनकारियों को रोकने के लिए जब बल प्रयोग किया तो जवाब में पथराव शुरू हो गया। टकराव का यह सिलसिला कई घंटे तक चलता रहा। इस दौरान युवा आंदोलनकारी आजादी की मांग के लिए संघर्ष करने के नारे लगाते रहे।

अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के नजदीक पहुंचकर उन्होंने चीन को रोकने और हांगकांग को आजादी दिलाने के नारेबाजी की। पुलिस ने कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने हांगकांग के आंदोलन से निपटने में चीन से संयम रखने की अपील की। रक्षा मंत्री मार्क एस्पर इन दिनों पेरिस की यात्रा पर हैं। अगस्त में राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को हांगकांग की समस्या मानवीय तरीके से सुलझाने की सलाह दी थी। सन 1997 तक ब्रिटिश उपनिवेश रहा हांगकांग इस शर्त के साथ चीन को दिया गया था कि नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार बने रहेंगे। चीन ने हांगकांग को स्वायत्तता दी। लेकिन धीरे नागरिक अधिकारों में धीरे-धीरे कटौती शुरू कर दी। इससे हांगकांग वासियों को लगने लगा कि एक दिन उनकी स्वायत्ता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसी के बाद वहां लोकतंत्र की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ।