अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस: युवाओं के कौशल पर विशेष जोर

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Newsi7 Special अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर विशेष लेख

प्रतीक बाजपेई, लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस प्रतिवर्ष आठ सितंबर को मनाया जाता है, यह सरकारों, नागरिक समाज और हितधारकों के लिए विश्व साक्षरता दर में सुधार को उजागर करने और दुनिया की शेष साक्षरता चुनौतियों को प्रतिबिंबित करने का एक अवसर जैसा है।
साक्षरता का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों और सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा का एक प्रमुख बिंदु है।
सितंबर 2015 में विश्व के नेताओं द्वारा अपनाया गया संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य, अपने एजेंडे के हिस्से के रूप में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लोगों के जीवन में सीखने के अवसरों के सार्वभौमिक उपयोग को बढ़ावा देता है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 4 का एक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी युवा साक्षरता हासिल कर सकें और जिन वयस्कों में इन कौशलों का अभाव है, उन्हें हासिल करने का अवसर मिले।

युवाओं में कौशलता लाने के लिए इस बार साक्षरता दिवस की थीम “साक्षरता और बहुभाषावाद” रखा गया है। अगर बात सिर्फ भारत की करें तोयहाँ पर यह समझने वाली बात होती है कि ज़मीनी स्तर पर साक्षरता जैसे अभियान किस तरह संचालित हो रहे हैं? परीक्षाएं कैसे हो रही हैं । क्या परीक्षाओं में नकल होती है। इन सब सवालों के साथ-साथ एक सवाल ये भी उठता है कि ये अभियान कहीं हस्ताक्षर करने वाली साक्षरता के बहाने इससे जुड़े आँकड़ों को बढ़ाने मात्र के लिए तो नहीं चलाया जा रहा है।

जैसा की इस बार यूनेस्को ने साक्षरता को बढ़ावा देने के साथ बहुभाषा को थीम बनाया गया है। सबसे पहले तो ये जानना बहुत जरुरी है कि बहुभाषावाद है क्या ? असल में भारत में अधिकतर स्कूल हिंदी या अंग्रेजी भाषा में ही पाठ्यक्रम चला रहे हैं। इस विषय-वस्तु का उद्देश्य जागरूकता और सकारात्मक समझ को उजागर करना है। आज विश्व में बहुत से लोग निरक्षर हैं। एक वैश्विक निगरानी रिपोर्ट की अगर माने तो विश्व भर में 7750 लाख वयस्क हैं। हर पांचवा पुरुष अनपढ़ है। ऐसा माना जाता है कि लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा को आसानी से अपना लेते हैं और उसी भाषा में सीखना पढ़ना पसन्द करते हैं। साक्षरता सिर्फ लिखने पढ़ने तक सीमित नहीं होती। चीजों का सही विश्लेषण भी आपको साक्षर बनाता है।