चाँद को मुठ्ठी में करने का सपना होगा साकार

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अनिल त्रिपाठी। अमरीका 12 प्रयासों और रूस 7 प्रयासों के बाद ही चन्द्रमा के उत्तरी भाग पर पँहुचने में सफल हो पाए।चन्द्रमा के दक्षिणी भाग की दुरुहताओं को देखते हुए इन दोनों का भी उस हिस्से पर उतरने का कार्यक्रम फिहलाल योजना के ही चरण में है,..या यूँ कहा जाय कि अभी उस भाग पर उतरने का साहस या तकनीक नहीं जुटा पाए,..और हमारे वैज्ञानिकों ने…!

न केवल दक्षिणी भाग पर ही उतरने का संकल्प किया बल्कि अपने पहले ही प्रयास में मिशन के 95% हिस्से को सफल बनाया,..अभी भी उम्मीद की हल्की सी किरण बाक़ी है,शायद कोई चमत्कार हो ही जाए….,

बहरहाल सारी बातों के बावजूद ये देश ही नहीं दुनिया के लिए भी बड़ी..बहुत बड़ी कामयाबी है कि हमारे वैज्ञानिकों ने ऐसे मिशन पर सामान्यतः आने वाले ख़र्च के सौवें भाग से भी कम ख़र्च पर ऐसे कार्यक्रम पूर्ण कर पाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है ,यह विशिष्टता निश्चित ही निकट भविष्य में अंतरिक्ष-मिशन के क्षेत्र में भारत को वैश्विक अगुआ के तौर पर स्थापित करेगी। विक्रम से संपर्क टूटा है,किन्तु चाँद को मुट्ठी में करने का हमारा संकल्प नहीं, वर्तमान मिशन तो अगले प्रयासों में सफल होना ही है।

इसरो देश को आप पर गर्व है।