संयुक्ता भाटिया लखनऊ को नंबर वन शहर बनाने के लिए प्रतिबद्ध

Web Journalism course

लखनऊ। उ.प्र. निकाय चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद महिला सशक्तिकरण का झंडा बुलंद करते हुए लखनऊ को पहली महिला मेयर  सयुंक्ता भाटिया के रूप में मिली। नवाबों के शहर को 100 साल में पहली बार महिला मेयर मिला। आजादी के बाद पहली बार लखनऊ मेयर की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की गई। मेयर का पद ग्रहण करने के बाद सयुंक्ता भाटिया लखनऊ को नंबर वन शहर बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता कई बार दोहरा चुकी हैं।  शहर को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने, कूड़ा निस्तारण कर शहर को साफ-सुथरा बनाने, ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए अतिक्रमण दूर करने जैसे मुख्य मुद्दों पर श्रीमति भाटिया प्राथमिकता के साथ काम कर रही हैं, उनके प्रयासों का असर शहर में दिखने लगा है।

  श्रीमति भाटिया ने कहा है कि केंद्र और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने से नगर निगम की योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। महिला मेयर से शहर की महिलाओं को भी बड़ी आशाएं हैं। सयुंक्ता ने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर कहा है कि इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 1090 की तरह प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की महिला हेल्प लाइन-1076 को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जायेगा।

सयुंक्ता भाटिया का जीवन परिचय- 

संयुक्ता भाटिया 90 के दशक में कैंट से विधायक रहे स्वर्गीय सतीश भाटिया की पत्नी हैं। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) में संयुक्ता की अच्छी पकड़ मानी जाती है। संयुक्ता संघ की अवध प्रांत की महिला समन्वयक हैं, जबकि उनके बेटे प्रशांत भाटिया लखनऊ के विभाग कार्यवाह हैं। संयुक्ता भाटिया का पूरा परिवार बीजेपी और संघ से जुड़ा हुआ है।

संयुक्ता भाटिया मूलतः पंजाब की रहने वाली हैं। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त इनकी ज्यादातर खेत और जमीनें पाकिस्तान अधिकृत पंजाब में चली गई थी।

इनके पिता पेशे से किसान थे और एक सोशल एक्टिविस्ट भी रहे। वहीं, उनकी मां हाउस वाइफ थी। अस्सी के दशक में संयुक्ता की शादी सतीश भाटिया सो हो गई थी।

उत्तर प्रदेश म्युनिसिपल एक्ट 1916 में बना था। तब से अब तक लखनऊ में कोई भी महिला मेयर नहीं बनी। 2012 में बीजेपी के दिनेश शर्मा मेयर चुने गए थे। 1960 में लखनऊ में नगर निगम बना था। जनसंघ विचारधारा से जुड़े राजकुमार श्रीवास्तव लखनऊ के पहले नगर प्रमुख बने थे। 57 साल के इतिहास में अब तक 18 नगर प्रमुख और महापौर चुने जा चुके हैं। 21 नवंबर 2002 से नगर निगम में नगर प्रमुख को महापौर (मेयर) का नाम दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.