Chaitra Navratri 2019: कैसे करें पूजा और व्रत, जाने

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अनुष्ठान और साधना के लिए चैत्र नवरात्रि श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इस नवरात्रि में 6 अप्रैल 2019 शनिवार से शुरू हो रहा है, जो 13 अप्रैल को राम नवमी के त्योहार के साथ सम्पन्न पूर्ण होगा।  इस बार नवरात्रि 8 दिनों की है, और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 11 बजकर 44 मिनट से लेकर 12 बजकर 34 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा। पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्र से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ भी माना जाता है।

इस नवरात्रि की पूजा प्रतिपदा से आरंभ होती है परंतु यदि कोई साधक प्रतिपदा से पूजन न कर सके तो वह सप्तमी से भी आरंभ कर सकता है। इसमें भी संभव न हो सके, तो अष्टमी तिथि से आरंभ कर सकता है। यह भी संभव न हो सके तो नवमी तिथि में एक दिन का पूजन अवश्य करना चाहिए। 

नवरात्री के प्रथम दिन ही अखंड ज्योति जलाई जाती है जो नौ दिन तक निरंतर जलती रहनी चाहिए क्योंकि इसका बीच में बुझना अच्छा नही माना जाता है। नवरात्रि में उपवास एवं साधना का विशिष्ट महत्व है। भक्त प्रतिपदा से नवमी तक जल उपवास या दुग्ध उपवास से गायत्री अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं।

यदि साधक में ऐसा साम‌र्थ्य न हो, तो नौ दिन तक अस्वाद भोजन या फलाहार करना चाहिए। किसी कारण से ऐसी व्यवस्था न बन सके तो सप्तमी-अष्टमी या केवल नवमी के दिन उपवास कर लेना चाहिए। अपने समय, परिस्थिति एवं साम‌र्थ्य के अनुरूप ही उपवास आदि करना चाहिए।