महज औपचारिकता नहीं है एसआइपी में निवेश, समझेें

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आजकल बड़ी संख्या में निवेशक एसआइपी में निवेश कर रहे हैं। लेकिन ऐसे निवेशकों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होगी जो 10 सालाेेें से एसआइपी में लगातार निवेश कर रहे हैं क्योंकि एसआइपी के जरिये निवेश के प्रति लोगों में जागरूकता और संस्कृति पिछले सात-आठ साल में ही बढ़ी है। वैसे तो एसआइपी के जरिये निवेश करने पर शानदार रिटर्न मिलता है। लेकिन शानदार रिटर्न और वैल्यू उस समय नहीं मिल सकती है जब निवेशक बहुत कम रकम हर महीने निवेश करते हों।

कई बचतकर्ता एसआइपी के जरिये इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करते हैं लेकिन मासिक बचत राशि में कई वृद्धि नहीं करते हैं। किसी ने 2004 में 10,000 रुपये प्रति माह का एसआइपी शुरू किया। बाद के वर्षो में भी उसने यही राशि एसआइपी में जमा कराई। 2004 में यह रकम उसकी आय के मुकाबले 20 फीसद थी। जबकि अब यह करीब सात फीसद है।

ज्यादातर बचतकर्ताओं की आय हर साल अच्छी दर से बढ़ जाती है लेकिन वे एसआइपी में हर साल पांच फीसद भी वृद्धि नहीं करते हैं। इसका भी आपके कुल निवेश पर खासा असर दिखाई देता है जब आप अपना निवेश निकाल रहे होते हैं।

अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश पर रिटर्न की उच्च दर ही पर्याप्त नहीं है। अगर आप अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं तो रिटायरमेंट के समय अच्छी रकम हासिल करने के लिए एसआइपी का निवेश समय-समय पर बढ़ाते रहना चाहिए।

देश में बचतकर्ता फिक्स्ड-इनकम की मानसिकता से बाहर निकल रहे हैं और शेयर आधार निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। शुरुआत में बेहतर है कि आप कम निवेश ही करें। लेकिन यह कतई तार्किक नहीं है कि दशकों तक आप बहुत मामूली ही निवेश करते रहें। अगर आप अच्छा रिटर्न और बड़ी रकम जुटाना चाहते हैं तो आपको निवेश भी बढ़ाना होगा।