Newsi7 Special: किराए की कोख का धंधा बंद, सरोगेसी कानून एक सराहनीय पहल

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पराग कुमार

पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार आम लाेगाें की भलाई के लिए वचनबद्ध है और खासकर महिलाओंं की बेहतरी के लिए उसने अनेक काम किए हैं। इसी क्रम में भारत सरकार ने महिलाओं काे शाेषण से बचाने के लिए सराेगेसी बिल पास किया है। अब किसी दंपत्ती या व्यक्तिगत रूप से किराए की काेख हासिल करने की राह बेहद मुश्किल कर दी गई है।

क्या है सराेगेसी- सराेगेसी यानि किसी और के लिए गर्भवती बनना। भारत में लंबे समय से सराेगेसी पर कानून एक बहस का मुद्दा रहा है। इस कानून के लागू हाेने से सराेगेसी की व्यावसायिक गतिविधियाें पर शायद प्रतिबंध लग जाये लेकिन हाे सकता है कि सराेगेसी का एक गैर कानूनी बाजार भी खड़ा रहे।

पूरे देश में करीब 1 हजार कराेड़ और तकरीबन 3 हजार क्लीनिक का यह अवैध काराेबार बंद हाे सकता है। यह जानना ज़रूरी है कि दिल्ली-एनसीआर किराये पर काेख देने वाली महिला से अधिक डॉक्टर- एजेंट की कमाई हाेती है। सूत्राें की माने ताे प्रति मरीज 6 से 7 लाख रूपये माता पिता से लेने के बाद सराेगेट मां काे 2 से 3 लाख रूपये ही मिल पाते हैं।

सराेगेसी का कानून- अब इस कानून के तहत इच्छुक दंपत्ती काे 90 दिनाें के अंदर बच्चे पैैदा करने में असमर्थ हाेने का प्रमाणपत्र देना हाेगा और सराेगेसी के लिए अपने किसी रिश्तेदार का ही चयन करना हाेगा।

अब सराेगेसी के तहत प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने व इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।