सावधानी से करें शिशु का शाही स्नान

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आप अगर  काेमल बेबी की माँ हैं तो ध्यान दीजिएगा सलोना शिशु इन दिनों आलसी हो सकता है। खासकर तब जब आप उसे नहलाने की चेष्टा करें। अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो उसके नहाने का और आपके नहलाने का मजा बढ़ सकता है। नन्हे शिशु बेहद काेमल होते हैं उनकी देखभाल में भी उसी कोमलता की जरुरत होती है। रोजमर्रा के कार्यों से हमारे हाथों में एक प्रकार की कठोरता आ जाती है। अत: शिशु स्नान के दौरान हाथों से विशेष प्रकार की सावधानी बरतनी चाहिए। अन्यथा आपके कटे-फटे नाखून या खुरदूरे हाथों से बच्चे की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुँच सकता है।

कमर के नीचे, पिछले हिस्से, मुँह, गर्दन तथा त्वचा के मोड़ों के सिवाय शिशु के शरीर के अन्य हिस्से आसानी से गन्दे नहीं होते, इसलिए हर रोज शिशु का मुँह, हाथ और पिछला हिस्सा साफ करने से ही काम चल जाता है तथा उसे नहलाने की जरूरत 2-3 दिन में ही पड़ती है।

रोजाना की सफाई : शिशु को मजबूत सतह पर लिटाएँ। रूई के साफ फाहे को भिगोकर निचोड़ लें तथा सावधानी से आँखों (नाक वाली तरफ से बाहर की ओर), कानों, मुँह, गर्दन, हाथ और नैपी में लिपटे भाग को पोंछ डालें। कानों के केवल बाहरी और पिछले हिस्से को ही साफ करें, कान के छेद में बिल्कुल भी कुछ न डालें। नैपी वाले भाग में सफाई के बाद थोड़ा सा बेबी लोशन लगा दें। 

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