पुलिस और जनता के बीच सामन्जस्य जरूरी, व्यवस्था में परिवर्तन की मांग

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लखनऊ। पुलिस और जनता के बीच सामन्जस्य स्थापित करने के लिए पुलिसजनों की मांगों के समर्थन में आज राज्य पुलिस कर्मचारी जन परिषद, उ.प्र. के बैनर तले लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर  वैचारिक सभा का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम बुद्धिजीवी, समाजसेवी, मनोचिकित्सक, न्यायाधीश, अधिवक्ता और राज्य कर्मचारी संगठन से जुड़े लोग शामिल हुए।

सभा के बाद बाबू रामाजी सिंह मेमोरियल सेवा संस्थान एवं राज्य  पुलिस कर्मचारी जन परिषद के अध्यक्ष अजय सिंह  के नेतृत्व में प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक को सम्बोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से प्रेषित किया गया।

श्री अजय सिंह ने पत्रकारों से वार्ता में बताया कि इस सभा को आयोजित करने का उद्देश्य विविध रूप से पुलिसिंग व्यवस्था में परिवर्तन करके पुलिस और जनता के बीच सामंजस्य स्थापित कराना है। श्री सिंह ने बताया कि हमारी विभिन्न मांगे इस प्रकार हैं-

  • पुलिसजनों के संगठन को वैधानिक मान्यता दी जाये।
  • राज्य की विधान परिषद में पुलिसजनों को अनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया जाये।
  • पुलिस रेगुलेशन एक्ट  1861, जोकि अंग्रेजों द्वारा बनाया गया है, उसे पूर्णतया समाप्त कर भारतीय पुलिस सेवा के तहत पुलिस में भर्ती केवल एक ही पद पर की जाये एवं दक्षता के आधार पर सर्वोच्च पद पर पदोन्नति की जाये।
  • राज्य के सभी पुलिस कर्मचारी जिन्हें कार्यवाही के माध्यम से निलम्बित, बर्खास्त व गिरफ्तार किया गया है, उन्हें बिना शर्त सेवा में लिया जाये, जिससे संख्या बल पूरा किया जा सके।
  • 8 घंटे की ड्यूटी और साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य किया जाये।
  • पौष्टिक आहार भत्ता 10,000 रूपये किया जाये एवं मंहगाई के आधार पर अन्य भत्तों में बढ़ोत्तरी की जाये।
  • वेतन विसंगति दूर की जाये। पुरानी पेंशन बहाल की जाये।
  • बार्डर स्कीम समाप्त कर सीमावर्ती जिलों में तैनाती दी जाये।
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2006 के आदेश के अनुपालन में स्टेट सिक्युरिटी कमीशन की स्थापना, पुलिस इस्टैबशिमेंट बोर्ड का गठन, पुलिस कम्प्लेंट अथॉरिटी व तकनीकी शाखा, कानून व्यवस्था विवेचना एवं वी.वी.आई.पी. सुरक्षा आदि के संबंध में दिये गये आदेशों को तत्काल लागू किया जाये।