पीएम मोदी- स्टैचू ऑफ यूनिटी हमारे इंजीनियरिंग और तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक

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पीएम मोदी ने बताया कि मुख्यमंत्री रहते ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट की कल्पना की थी। मोदी ने कहा कि मुझे लोहा अभियान के दौरान लोहे का पहला टुकड़ा भी सौंपा गया है। मैं गुजरात के लोगों के प्रति कृतज्ञ हूं। मैं इन चीजों को यहीं पर छोड़ूंगा, ताकि देश इसे देख सके। उन्होंने कहा कि जब यह कल्पना मन में चल रही थी, तो मैं यहां के पहाड़ों को खोज रहा था।

 

 

 

 

 

मेरा विचार था कि नक्काशी कर सरदार साहब की प्रतिमा उस पर निकाली जाए। लेकिन जांच के बाद ऐसी कोई मजबूत चट्टान नहीं मिली। फिर विचार बदलना पड़ा। आज जो रूप आप देख रहे हैं, उसने वहीं से जन्म लिया। इस परियोजना की कल्पना मैंने तब की थी जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था। इस प्रतिमा के निर्माण के लिए लाखों किसान साथ आए और अपने औजार और मिट्टी देकर अपने हिस्से का योगदान दिया।

 निराशावादियों को भी लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से बिखर जाएगा। निराशा के उस दौर में भी सभी को एक किरण दिखती है। और यह उम्मीद की किरण थे सरदार वल्लभ भाई पटेल। सरदार पटेल में कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी महाराज के शौर्य का समावेश था। उन्होंने पांच जुलाई 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था- विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, दुश्मनी, बैर का भाव हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है। और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है। सरदार साहब के इसी संवाद से एकीकरण की शक्ति को समझते हुए राजा-रजवाड़ों ने अपने विलय का फैसला किया। देखते ही देखते भारत एक हो गया।

सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता, तो आज गिर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए और हैदराबाद चार मीनार को देखने के लिए हमें वीजा लेना पड़ता। सरदार साहब का संकल्प न होता, तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सीधी ट्रेन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। सरदार साहब का संकल्प न होता, तो सिविल सेवा जैसा प्रशासनिक ढांचा खड़ा करने में हमें बहुत मुश्किल होती।

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