मायावती का कांग्रेस काे करारा झटका

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बसपा प्रमुख मायावती ने छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने का एलान कर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की विपक्षी दलों की उम्मीदों पर पानी फेरने का ही काम किया है। मायावती का यह फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए किसी झटके से कम नहीं, जो भाजपा विरोध के नाम पर पूरे देश में विपक्षी दलों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।

बसपा के इस फैसले के बाद अगले आम चुनाव के पहले भाजपा और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साझा चुनौती देने की विपक्षी दलों की कोशिश के कामयाब होने के आसार और कम दिखने लगे हैं।

विपक्षी दलों का महागठबंधन यदि आकार नहीं ले पा रहा है या अपनी विश्वसनीयता कायम नहीं कर पा रहा है तो इसके लिए उसके नेता ही जिम्मेदार हैं। विपक्षी नेता जिस महागठबंधन की बात कर रहे हैं उसने अब तक न तो कोई सार्थक एजेंडा सामने रखा है और न ही यह स्पष्ट हो सका है कि ऐसे किसी गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा?

सबसे बड़ी समस्या तो इस गठबंधन का नेतृत्व करने की इच्छा रखने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से खड़ी की जा रही है। वह न तो अपने दल को कोई नीतिगत दिशा दे पा रहे हैं और न ही अन्य विपक्षी दलों को। किसी विपक्षी नेता की ओर से सरकार की आलोचना और निंदा तो समझ में आती है, लेकिन निराशाजनक यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से कोई वैकल्पिक विचार पेश नहीं किया जा रहा है।

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