देश का यह सबसे खूबसूरत पर्यटन स्‍थल हाे रहा बदहाल

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देश के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्‍थलों में शुमार नैनीताल आपदा के मुहाने पर खड़ा है। हर दिन इसके कुछ न कुछ ऐसे संकेत मिल रहे हैं जो बेहद डरावने हैं। कुछ दिनों पहले जहां नैनीताल की लोवर माल रोड का बड़ा हिस्‍सा नैनी झील में धंस गया था वहीं बलियानाला की पहाड़ियों का दरकना निरंतर जारी है। अब तक तकरीबन 34 परिवारों को वहां से शिफ्ट किया जा चुका है। लोवर माल रोड को फिलहाल फौरी तौर पर दुरुस्‍त कर हल्‍के वाहनों को चलने की छूट दे दी गई है।  दिनों दिन बढ़ता शहर का बोझ और अंधाधुंध हुए निर्माण ने शहर के हालात को काफी जटिल बना दिया है। 

वर्तमान में नैनीताल की बसासत इतनी सघन हो चुकी है कि अब निर्माण की गुंजाइश ही नहीं है। इसके बावजूद बचे खुचे स्‍थानों पर भी उपर तक पहुंच रखने वाले लोगों ने निर्माण कार्य जारी रखा। 

आम दिनों को छोड़ दिया जाए तो पर्यटन सीजन में भी बाहर से आने वाले वाहनों पर कोई प्रतिबंध नहीं। नतीजा ऐसे दिनों में पार्किंग पूरी तरह से फुल हो जाती है। वाहनों की भीड़ इस कदर बढ़ जाती है कि काठोदाम से नैनीताल तक वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। ऐसे में लोकल के लोगों को अपने घर और ऑफिसों में पहुंचने में काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है।

बार बार मांग उठने और प्रस्‍ताव बनने के बावजूद नैनीताल के लिए अभी तक इलेक्‍ट्रॉनिक वाहन अभी तक नहीं चल सके। इसका नुकसान होता है कि लोग व्‍यक्तिगत वाहन लेकर पहुंच जाते हैं। इससे जहां सरोवर नगरी में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ रहा है वहीं अनावश्‍यक का दबाव भी आपदा के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

 नैनीताल को नैसर्गिक सौंदर्य इस कदर को लोगों को भाता है किे हर कोई यहां खिंचा चला है। इससे दिन ब दिन सरोवर नगरी पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

 वनों का अंधाधुंध कटान भी सरोवर नगरी के लिए घातक साबत हुआ है। पेड़ों का कटना पहाड़ों के दरकने की बड़ी वजह मानी जाती है।

 नैनीताल में लोअर माल रोड के धंसने के कारण अपर माल रोड भी खतरे की जद में है। दरअसल माल रोड के ठीक ऊपर की पहाड़ी के भीतर भारी मात्रा में पानी रिसकर पहुंच रहा है। बलियानाले का ट्रीटमेंट जल्द नहीं किया तो हालात काफी खतरनाक हो सकते हैं। नैनीताल के हरिनगर, रईस होटल से लेकर तल्लीताल क्षेत्र को खतरा पैदा हो सकता है। 

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