अब एएमयू में पत्थरों पर मिलेगा हेरिटेज इमारतों का इतिहास, जानिए कैसे

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) ने नई पहल शुरू की है। यहां की हेरिटेज इमारतों का इतिहास जानने के लिए अब न तो किसी से पूछना पड़ेगा, न किसी इतिहास की किताब को पलटना पड़ेगा। इमारत कब बनी, किसने बनवाई, कितनी पुरानी है, यह ब्योरा इमारत के सामने ही पत्थर पर पढऩे को मिल जाएगा। फिलहाल 25 इमारतों के सामने पत्थर लगाए जा रहे हैं। अकेले एसएस हॉल (साउथ) में दर्जनभर पत्थर लगाए जा रहे हैैं।

यूनिवर्सिटी में पिछले दिनों पोल पर कुरान व अन्य महापुरुषों के विचारों से जुड़े बोर्ड लगाए गए थे। अब इमारत का इतिहास पत्थर पर उकेरा जा रहा है। गोल पत्थर के ऊपर इस लिखे हुए पत्थर को फिट किया जा रहा है। इसकी ऊंचाई सामान्य रखी है, ताकि इसे आसानी से पढ़ा जा सके। एसएस हॉल (साउथ) में एक पत्थर ट्रायल के रूप में लगाया जा चुका है। पत्थर पर लिखा है कि यह गेट स्ट्रेची हॉल के दाएं साइट में है। ये पटियाला के चीफ मिनिस्टर खलीफा सैयद महाराजा हसन के नाम पर है। 

 

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