उपराष्ट्रपति ने कहा- हिन्‍दी के बगैर हिन्‍दुस्‍तान को आगे बढ़ाना संभव नहीं

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हिंदी दिवस पर आज देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। 1949 में आज के ही दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को देश की राजभाषा के रूप में स्‍वीकार किया था। दिल्‍ली के विज्ञान भवन में आयेाजित समारोह में उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने  विभिन्‍न विभागों, मंत्रालयों और कार्यालयों के प्रमुखों को हिंदी को बढ़ावा देने में उत्‍कृष्‍ट योगदान के लिए राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्‍कार प्रदान किए। समारोह को संबोधित करते हुए श्री नायडु ने कहा कि हिन्‍दी के बगैर हिन्‍दुस्‍तान को आगे बढ़ाना संभव नहीं। श्री नायडु ने कहा कि सबको अपनी मातृभाषा से प्रेम होना चाहिए। 

श्री नायडु ने कहा कि कोई भी देश हो उसे अपनी मातृभाषा को प्रोत्‍साहन करना बहुत जरूरी है। सभी भाषा सीखना चाहिए, बोलना चाहिए। मगर सबसे पहले मातृभाषा, भारतीयों को अपनी भाषा सीखना चाहिए, अपनाी भाषा बोलनी चाहिए।  

समारोह की अध्‍यक्षता करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिन्‍दी देश को जोड़ती है।  पूरे विश्‍व में हिन्‍दी के प्रति आकर्षण के बारे में श्री सिंह ने कहा कि गूगल जैसी कंपनी भी हिंदी को बढ़ावा दे रही है। माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक भी इसको बढ़ावा दे रही है। हिंदी को बढ़ावा देने के पीछे आर्थिक दृष्टि काम करती है। उन्‍होंने समझ लिया है कि भारत और भारतीयता से प्रभावित लोगों के बीच अपने उत्‍पाद को यदि हमें स्‍थापित करना है तो हिंदी को अपनाना ही होगा। 

इस समारोह में गृह राज्‍य मंत्री हंसराज अहीर, किरेन रिजिजू और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए।

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