छोटे बच्चे को क्यों आती हैं हिचकियां

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नवजात शिशु के हिचकी लेते ही माता पिता अक्सर परेशान हो जाते हैं. लेकिन हम आपको बता दे की बच्चे का हिचकी लेना एक सामान्य घटना हैं और इसे लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए. फेफड़ों के नीचे मौजूद झिल्ली की मांसपेशियों में संकुचन होता हों तो हिचकियां आती हैं. हिचकियां कई कारणों से आ सकती हैं. शिशु को हिचकी आने का सबसे बड़े कारण होता हैं, दूध पीते हुए हवा अंदर ले लेना, भरा हुआ पेट (जिसमें हवा भी हो सकती है) या सांस से जुड़ी बीमारियां या डीईआरडी. हालांकि ये गंभीर बीमारियों के कारण कम ही होती हैं. 

क्या करें?

शिशु को अचानक हिचकी आने लगे तो घबराएं नहीं.

आमतौर पर हिचकियां अपने आप थोड़ी देर में ठीक हो जाती हैं. आप बच्चे की पीठ सहला सकते हैं. 

‘बच्चे को सीधा पकड़ें, उसकी चिन अपने कंधे पर टिकाएं. बच्चे की पीठ पर ऊपर की तरफ हाथ ले जाते हुए मसाज करें. इससे उसे डकार आने में मदद मिलेगी.’

दूध पिलाने के दौरान यदि शिशु को हिचकियां आने लगे तो थोड़ा ठहर कर रपपक जाए. हिचकी बंद होने के बाद फिर पिलाएं.

अगर बच्चे को बोतल से दूध पिलाते हैं तो दूध पिलाने के दो तीन मिनट के बाद उसे डकार ज़रूर दिलाएं.

इस समय करें चिंता:

बार-बार हिचकियां गैस संबंधी समस्याओं या कॉलिक से भी आती हैं. अगर आपके बच्चे को ऐसा हर दो या तीन घंटे में हो रहा है तो उसके डॉक्टर को बताएं.

सांस संबंधी समस्या के कारण भी हिचकियां आती हैं. इसलिए बेहतर है कि हिचकियों की समस्या होने पर बच्चे को एक बार डॉक्टर के पास ले जाएं.

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