प्रो.रामशंकर कठेरिया ने कहा- एएमयू के जवाब से संतुष्ट नहीं एसटी आयोग

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अलीगढ़। प्रवेश तथा भर्ती में अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़े वर्ग को आरक्षण ने देने का मामला फिर तूल पकड़ रहा है। कल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में पेश होकर जो जवाब दिया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि एएमयू के जवाब से हम संतुष्ट नहीं हैं। इस मामले में हम 15 दिन बाद फिर बैठक करेंगे। एएमयू ने दो-तीन हजार पेज के जो दस्तावेज पेश किए हैं, उनका अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर आयोग भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस में पक्षकार बनने का प्रयास करेगा।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया तीन जुलाई को अलीगढ़ आए थे। उन्होंने तभी एएमयू में आरक्षण न मिलने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। एएमयू व प्रशासनिक अफसरों की बैठक भी ली थी। नोटिस देकर चेताया था कि जवाब न देने पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर एएमयू की ग्रांट रुकवा देंगे। आयोग ने कुलपति व रजिस्ट्रार को कल पेश होकर जवाब देने को समन किया। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर व रजिस्ट्रार प्रो. नाजिम हुसैन जाफरी के साथ दिल्ली पहुंचे।

आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के सचिव व संयुक्त सचिव, सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव, अल्पसंख्यक विभाग के सचिव व यूजीसी के अफसर भी शामिल हुए। प्रो. कठेरिया ने कुलपति से सीधे सवाल किए। कुलपति ने जवाब दिए, लेकिन आयोग संतुष्ट नहीं हुआ।

बकौल प्रो. कठेरिया, एएमयू कुलपति 2000 से 3000 पेज के दस्तावेज लाए थे, लेकिन इनसे वह यह स्पष्ट नहीं कर सके कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है। आरक्षण क्यों नहीं दिया, इसका भी सटीक जवाब नहीं दे सके। एएमयू ने यही कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

अफसर बोले-नहीं दिया अल्पसंख्यक दर्जा

प्रो. कठेरिया ने बताया कि अल्पसंख्यक विभाग के सचिव ने बताया है कि एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान होने संबंधी कोई दर्जा नहीं दिया गया। एमएचआरडी के सचिव से पूछा सुप्रीम कोर्ट में क्या हलफनामा दिया है तो उन्होंने कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। यूजीसी से पूछा कि 1000 करोड़ रुपये क्या अल्पसंख्यक संस्थान को देते हैं। उन्होंने मना किया।

जवाब : मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

– 1968 में ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। फिर, आरक्षण क्यों नहीं दिया?

जवाब : एएमयू ने 1981 में अपने एक्ट में संशोधन किया और यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान मान लिया।

– पर, 1968 व 1981 के बीच आरक्षण क्यों नहीं दिया? 1981 के संशोधन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। फिर आरक्षण क्यों नहीं दिया?

जवाब : मामला कोर्ट में विचाराधीन है।