पैरामेडिकल क्षेत्र में युवा बना सकते हैं बेहतरीन करियर, जानिए कैसे…..

 

नयी दिल्ली। डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल कोर्स में दाखिला अगर किसी कारण से नहीं मिलता है तो निराश होने की जरूरत नहीं है।         जीवविज्ञान विषय पर आधारित करियर विकल्पों के बारे में भी विचार किया जा सकता है और पैरामेडिकल क्षेत्र भविष्य संवारने का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

पैरामेडिकल कोर्सेस में बी.एस.सी. नर्सिंग, ऑफ़ फिजियोथिरेपिस्ट,बैचलर ऑफ़ ओक्युपेशनल थेरेपिस्ट, बैचलर ऑफ़ फार्मेसी, बी.एस.सी.रेडियोलोजी एंड एक्स-रे टेक्नीशियन, अाॅपरेशन थियेटर असिस्टेंट्स, मेडिकल लैब टेक्नोलोजिस्ट, डेंटल हाइजीनिस्ट आदि  मौजूद हैं। इनके अतिरिक्त होम्योपैथी पर आधारित बी.एच.एम.एस, आयुर्वेद पर आधारित बी.ए.एम.एस, यूनानी चिकित्सा पर आधारित बी. यू. एम.एस आदि कोर्सेस का भी इस क्रम में महत्वपूर्ण विकल्प है।

पैरामेडिकल पेशे मेंभविष्य बनाने के लिए यह ज़रूरी है किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से सम्बंधित ट्रेड में उपयुक्त कोर्स और ट्रेनिंग हासिल की जाए। बारहवीं के बाद आमतौर पर उपलब्ध ऐसे कोर्स डिप्लोमा या ग्रेजुएशन स्तर के होते हैं। इनकी अवधि दो से चार वर्ष तक की होती है।

इस समय देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्र और राज्य सरकारें ध्यान केंद्रित कर रही हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र के लिए अधिक राशि का प्रावधान बजट में किया जाये।

यही नहीं निजी क्षेत्र के बड़े हॉस्पिटल समूह भी मोटे मुनाफे की आस में बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसे में नए हॉस्पिटल, क्लिनिक, मेडिकल लैब आदि के लिए ट्रेंड और अनुभवी लोगों की मांग में बढ़ोतरी आना स्वाभाविक है। खाड़ी के देशों और अन्य देशों में भी इस तरह के अनुभवी लोगों के लिए रोजगार के अवसर कुछ  कम नहीं है।

यह बताना ज़रूरी है कि अन्य प्रोफेशनल कोर्सेस की तुलना में इस तरह के कोर्सेस में दाखिला पाना अपेक्षाकृत ज्यादा आसान है।फार्मेसी का कोर्स करने वालों को कैमिस्ट की दुकान खोलने सम्बंधित लाइसेंस भी मिल जाता है।

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