Newsi7 Special- देश की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, निवेश और रोज़गार को मिली गति

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पराग कुमार (सम्पादक) की कलम से

यह खबर सचमुच राहत देने वाली और गर्व करने वाली है कि भारत, विश्व बैंक की ओर से जारी ताजा रैंकिंग में एक और पायदान का सुधार करते हुए अर्थव्यवस्था में 178 लाख करोड़ की जीडीपी वाला 6वीं रैंक पर पहुंचने वाला देश बन गया है। 

इसका मतलब यह हुआ कि जुलाई 2017 से तेजी से लागू हुए कर सुधारों की वजह से अर्थव्यवस्था में काफी उछाल आया और हमने फ्रांस को भी पीछे छोड़ दिया। इसका श्रेय केंद्र सरकार की दूरगाामी सोच को जाता है। जहां नोटबंदी और जीएसटी ने भारत की अर्थव्यवस्था को गति दी, वहीं विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आई है।

कुछ अन्य कारण भी हैं जिसके लिए केंद्र सरकार बधाई की पात्र है। उदाहरण के तौर पर देश में कारोबार और निवेश का बेहतर माहौल बना है। वर्ल्ड बैंक की अच्छी रैंकिंग के चलते विदेशी निवेशकों का रूझान बढ़ा है, बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं।  इससे देश में नौकरियों के भी मौकों में बढ़ोत्तरी हुई है। सबसे अधिक फायदा युवा वर्ग को हुआ है। इसमें कोई शक नहीं कि जीडीपी बढ़ने से भारत का युवा देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में अपना सहयोग करने को तैयार खड़ा है। जीडीपी की वृद्धि और अधिक हो सकती है, जब हम अपने युवाओं को अधिक से अधिक रोज़गार मुहैया करायें क्योंकि किसी भी देश की युवा आबादी उसकी रीढ़ होती है और हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। वैसे रोज़गार के अन्य क्षेत्रों में भी युवा वर्ग के कौशल और क्षमता का उपयोग किया जायेगा जिसमें उत्पादक संभावनाओं को तलाशा जा सके। 

 देश की जीडीपी बढ़ने से निश्चित तौर पर प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी होगी, उससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और विदेशी सामानों के आयात की मांग भी बढ़ेगी। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अगर इसी रफ्तार से भारत की अर्थव्यवस्था में उछाल आता गया और जीडीपी बढ़ता रहा तो आने वाले एक-दो सालों में हम ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ देंगे तथा पांचवें स्थान पर काबिज हो सकते हैं। 

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( आईएमएफ) के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत की जीडीपी 7.4 प्रतिशत और 2019-20 में 7.8 प्रतिशत रहने के आसार हैं। जो देश की विकास दर के लिए अच्छा सूचक है। 

 उम्मीद है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे कड़े कदम उठाने के बाद शायद सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने पड़े जो जनता को भले ही कुछ समय के लिए तकलीफ दें, लेकिन भविष्य में सुकून भरे परिणाम देगा, क्योंकि मुद्दा तो देश हित से जुड़ी अर्थव्यवस्था का है और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी का है, जिसे आम जनता तक पहुंचना ही चाहिए। आखिर हमारा लक्ष्य विश्व बैंक की रिपोर्ट में टॉप तीन रैंकिंग में पहुंचना है।