फेफड़ों की बीमारी सीओपीडी है कितनी घातक, जानिए बचाव के तरीके…..

लख़नऊ।  कहते हैं,फेफडे़ शरीर में धौंकनी का काम करते हैं । ये पूरे शरीर में विशुद्ध ऑक्सीज़न पहुंचाते हैं, लेकिन जब ऑक्सीज़न की जगह इन्हें धूल,धुअां अाैर प्रदूषण में काम करना होता है,  तो ये नाराज भी हाे सकते हैं। इनकी कार्यक्षमता में कमी आते ही शरीर में तमाम तरह की व्याधियां उत्पन्न होने लगती हैं। सीअाेपीडी भी उनमें से एक समस्या है। इस राेग के पीछे कई तरह के कारण हाे सकते हैं।

क्या है सीअाेपीडी, तो आईये आपको बताते हैं सीअाेपीडी के बारे में। इसे क्रॉनिक अॉब्सट्रक्टिव पल्माेनरी डिजीज़ काे सामान्य भाषा में क्निर क्रॉनिक ब्रॉंकाइटिस या फेफड़ों की बीमारी भी कहते हैं। इस बीमारी का सीधा संबंध शरीर में ऑक्सीज़न के घटते प्रवाह से होता है। शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाले छोटे छोटे वायुतंत्रों में गड़बड़ी आने से सांस लेना तक दूभर होने लगता है।

कैसे पहचानें सीअाेपीडी काे- लखनऊ के सिविल अस्पताल के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ अशोक यादव के अनुसार सीआेपीडी के प्राथमिक लक्षण पहचानना काफी अासान है। अगर दाे महीने तक लगातार बलगम वाली खांसी अाती है और यह पिछले दाे साल से हाे रहा हाे ताे समझ लीजिए कि आपकाे डाक्टर से तुरंत मिलने की जरूरत है।

सिगरेट,बीड़ी हाे या गांजा,किसी भी तरह से धुएं काे भीतर लेना हमारे फेफड़ों पर अत्याचार है ।डॉ अशोक यादव बताते हैं कि हिन्दुस्तान में गांवों में चूल्हे में भाेजन बनाना भी इसकी एक मुख्य वजह है। हमारे देश की 60 फीसदी जनता गांवों में रहती है, जहां आज भी गैस सिलेंडर की उपलब्धता नहीं है। गामीण इलाकों में बायाे मास फयूल सीआेपीडी की एक बड़ी वजह है ।इसके अलावा बीड़ी भी इसमें मुख्य भूमिका निभाती है ।

डॉक्टर यादव के अनुसार पलमाेनरी फंकशन टेस्ट से पता चलता है कि फेफड़ों का कितना नुकसान हाे चुका है। इसके बाद का बचाव मरीज के हाथ होता है l अगर वह धूम्रपान करता रहेगा ताे फेफड़े कमजोर होते रहेंगे।

सीअाेपीडी से बचाव के उपाय  –

1. धूम्रपान से तौबा करें। 2. तम्बाकू आदि से छुटकारा पाने के लिए टाेबैकाे रिसेशन क्लीनिकस की मदद ले सकते हैं। 3. डॉक्टर से जांच करा कर दवाएं लें ।4. धूल, धुआं, प्रदूषण अाैर धूल वाले वातावरण में अपना घर न बनाएं ।5. राेज व्यायाम करें।

साथ ही सीअाेपीडी हाे ताे वजन तुरंत घटा ले। माेटापे की समस्या होने पर लाेगाें काे अॉब्सट्रक्टिव स्लीप एपिनया सिंड्रोम हो जाता है। इससे सांस की नलियां अवरूद्ध हाे जाती हैं अाैर ऑक्सीजन का प्रवाह शरीर में कम हाे जाता है ।

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