रियल्टी कंपनियों पर लगाम लगाएगा दिवालिया कानून का नया अध्यादेश

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दिवालियापन पर संशोधित कानून ‘इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड’ में संशोधन से रियल एस्टेट क्षेत्र की ऐसी कंपनियां खत्म हो जाएंगी जो ग्राहकों को घर देने के नाम पर पैसा लेकर रातों रात भाग जाती हैं। साथ ही इससे आवासीय परियोजनाओं को समय पर पूरा भी किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को एक फेसबुक पोस्ट में यह बात कही। जेटली ने कहा कि दिवालियेपन पर कानून में बदलाव से रियल एस्टेट क्षेत्र को संगठित रूप देने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर दिवालियेपन पर कानून में संशोधन किया है। पिछले हफ्ते ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दी थी। आइबीसी में इस संशोधन के बाद दिवालियेपन की कार्यवाही में मकान खरीदने वालों को भी फाइनेंशियल क्रेडिटर माना जाएगा।

जेटली ने कहा कि अब सिर्फ नियमों का पालन करने वाले रियल एस्टेट डवलपर्स ही बचेंगे। निवेशकों को पैसा लेकर रातों-रात भागने वाले डवलपर्स खत्म हो जाएंगे। परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में दहाई अंक में वृद्धि हो रही है और रियल्टी कानून रेरा तथा नए अध्यादेश से इस प्रक्रिया में और तेजी जाएगी। जेटली ने कहा कि नए अध्यादेश के तहत रियल एस्टेट परियोजना के अलॉटी यानी खरादीर का दर्जा फाइनेंशियल क्रेडिटर के बराबर होगा।

अगर कोई डवलपर नियमों का पालन नहीं कर रहा है तो वे कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। उन्हें क्रेडिटर्स की कमेटी में भी शामिल होने का अधिकार होगा। उन्हें मताधिकार भी प्राप्त होगा। इस तरह वह रिजॉल्यूशन प्रोसेस को प्रभावित कर सकते हैं। इस तरह उस कंपनी बिकने की स्थिति में भी वह अन्य फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के बराबर हैसियत में होगा।

जेटली ने कहा कि देश में बहुत से टाउनशिप विकसित हो रहे हैं और इनमें से कई पेशेवर रियल एस्टेट डवलपर्स द्वारा विकसित किए जा रहे हैं। हालांकि इस क्षेत्र में कई ऐसी कंपनियां भी आ गई हैं जो निवेशकों से पैसा लेकर रातों-रात भाग जाती हैं। कुछ डवलपर के पास अपना बहुत कम पैसा होता है। वे मकान खरीदने वालों के पैसे का ही इस्तेमाल परियोजना में करते हैं और जमीन खरीदते जाते हैं। इसके बाद वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी मकान खरीदने वाले को उठानी पड़ती है।