हार्इकोर्ट का बड़ा आदेश, छह महीने के भीतर बनाया जाए जुवेैनाइल जस्टिस रूल्स

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हाई कोर्ट ने देहरादून नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी के साथ दुष्कर्म, दो अन्य संवासनियों की संदिग्ध मौत व शारीरिक उत्पीड़न के अलावा राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान में अबोध बच्चे के साथ कुकर्म को गंभीरता से लेते हुए अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को बाल उत्पीड़़न के मामलों में छह माह के भीतर जुवैनाइल जस्टिस रूल्स बनाने तथा छह माह के भीतर प्रत्येक जिले में शिशु कल्याण कमेटियों का गठन करने के आदेश पारित किए हैं।

अधिवक्ता शिवांगी गंगवार की ओर से देहरादून नारी निकेतन में संवासिनियों के साथ उत्पीडऩ के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। हाल ही में देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान के एक बच्चे के साथ कुकर्म मामले में पीडि़त के पिता द्वारा वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा को पत्र भेजा गया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ द्वारा चार अप्रैल को मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया।

25 लाख मुआवजा व प्रतिमाह 11 हजार पेंशन

हाई कोर्ट ने आदेश में इस तरह के मामलों में पीडि़तों को 25 लाख मुआवजा तथा प्रति माह 11 हजार रुपये पेंशन भुगतान करने को कहा है। इसके लिए राष्ट्रीय बैंक में खाता खोलकर धनराशि जमा करनी होगी। प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि ऐसे उत्पीडऩ के मामलों में बिना देरी के मामला दर्ज करते हुए तीन सप्ताह में जांच पूरी की जाए। सरकार छह माह के भीतर बच्चों की सुरक्षा व देखभाल के लिए जुवैनाइल जस्टिस रूल्स बनाए।

प्रत्येक जिले में बाल कल्याण कमेटी बनाए

कोर्ट ने प्रत्येक जिले में एक साल के भीतर बाल कल्याण कमेटी बनाने के आदेश पारित किए हैं। कमेटियों का चयन कमेटी द्वारा किया जाएगा। 

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