ATF के दाम बढ़ने से महंगा हो सकता है हवाई सफर: एक्सपर्ट

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बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद तक का इजाफा हो चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू परिचालन की लागत को पूरा करने के लिए विमानन कंपनियों को हवाई किराए में संशोधन को मजबूर होना पड़ सकता है।

एयरलाइन्स की कॉस्ट (लागत) में 45 फीसद हिस्सा जेट फ्यूल का होता है, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन कंपनियां हवाई किराए में 15 फीसद के इजाफे का विचार कर सकती हैं। हालांकि इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से एयरलाइन कंपनियों ने किनारा किया लेकिन कुछ निजी विमानन कंपनियों ने कहा है कि एटीएफ में वृद्धि के बाद बढ़ने वाली लागत को कैसे पूरा किया जाए इस पर अभी फैसला लिया जाना बाकी है जबकि परिस्थितियां किराए में बढ़ोतरी पर जोर दे रही हैं।  

बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद का इजाफा हो चुका है जिसमें से 25 फीसद इजाफा बीते 6 महीनों में ही हुआ है। इस अनिश्चितता पर एक निजी विमानन कंपनी के कार्यकारी ने बताया, “बीते साल नवंबर महीने से अब तक जेट फ्यूल की कीमत में 25 फीसद का इजाफा हो चुका है, ऐसे में यह हवाई किराए में बढ़ोतरी पर जोर देता है ताकि लागत को पूरा किया जा सके।”

एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने पर वित्त मंत्रालय से बात करेगा नागर विमानन मंत्रालय

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) कर व्यवस्था के दायरे में लाने को लेकर विमानन कंपनियों की बढ़ती मांग के बीच नागर विमानन सचिव आर एन चौबे ने कहा है कि वो इस मामले को वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाएंगे, क्योंकि जेट फ्यूल की कीमतें जनवरी 2017 के बाद से अब तक 40 फीसद तक बढ़ चुकी हैं।

उन्होंने बताया, “अगर एटीएफ को जीएसटी के अंतर्गत लाया जाता है तो हमें इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा।” साथ ही चौबे ने यह भी कहा कि वो इस संबंध में राजस्व सचिव हसमुख अधिया से मुलाकात करेंगे। चौबे ने यहां पर बंकर ऑयल का भी उदाहरण दिया, जिसे ऑयल बास्केट से निकालकर जीएसटी के दायरे में लाया गया है।

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